आजकल कई लोग अपनी CIBIL Report में “Written-off” या “Settled” स्टेटस देखकर कन्फ्यूज हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि दोनों एक ही चीज़ हैं, लेकिन वास्तव में इनका मतलब और प्रभाव अलग होता है।
इस पोस्ट में हम आसान भाषा में समझेंगे कि Written-off और Settled में क्या फर्क है और यह आपके क्रेडिट स्कोर पर कैसे असर डालता है।
🔴 Written-off क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक अपने लोन की EMI नहीं भरता, तो बैंक उस लोन को Written-off कर देता है।
इसका मतलब:
बैंक मान लेता है कि यह लोन वापस मिलना मुश्किल है
लोन को अपने रिकॉर्ड से हटाकर “लॉस” दिखा देता है
लेकिन उधार लेने वाला अभी भी कानूनी रूप से पैसे देने के लिए जिम्मेदार रहता है
📌 उदाहरण:
लोन राशि: ₹2 लाख
ग्राहक ने कई महीनों तक EMI नहीं भरी
बैंक ने लोन को Written-off मार्क कर दिया
👉 यह आपके CIBIL स्कोर पर बहुत नेगेटिव प्रभाव डालता है।
🔵 Settled क्या होता है?
Settled का मतलब है कि आपने बैंक से बात करके लोन का कुछ हिस्सा देकर बाकी माफ करवा लिया।
इसका मतलब:
आपने पूरा लोन नहीं चुकाया
बैंक ने कुछ रकम लेकर बाकी राशि माफ कर दी
आपके खाते को “Settled” मार्क कर दिया जाता है
📌 उदाहरण:
कुल बकाया: ₹2 लाख
ग्राहक ने ₹1.2 लाख देकर सेटलमेंट कर लिया
बैंक ने अकाउंट को Settled मार्क किया
👉 यह भी आपके CIBIL स्कोर पर नेगेटिव असर डालता है, लेकिन Written-off से थोड़ा कम।
⚖️ Written-off vs Settled (सीधा फर्क)
बिंदु
Written-off
Settled
भुगतान स्थिति
कोई भुगतान नहीं
आंशिक भुगतान
बैंक का निर्णय
लोन को नुकसान मानना
बातचीत के बाद निपटान
कानूनी जिम्मेदारी
रहती है
आंशिक रूप से खत्म
CIBIL पर असर
बहुत खराब
खराब
📊 Credit View (आसान समझ)
Written-off → लोन लंबे समय तक नहीं चुकाया
Settled → लोन का कुछ हिस्सा देकर समझौता किया
🚨 महत्वपूर्ण सलाह
हमेशा कोशिश करें कि लोन “Closed” स्टेटस में जाए, न कि Written-off या Settled
अगर पहले से Settled या Written-off है, तो:
बैंक से संपर्क करें
पूरा बकाया चुकाकर “Closed” अपडेट करवाएं
✅ निष्कर्ष
Written-off और Settled दोनों ही आपके क्रेडिट प्रोफाइल के लिए अच्छे नहीं हैं। अगर आपको भविष्य में लोन या क्रेडिट कार्ड चाहिए, तो इन स्टेटस से बचना बेहद जरूरी है।